फर्जी बैनामा मामले में रूसिया फर्नीचर के मालिक को कोर्ट ने किया तलब
अदालत ने कृष्ण गोपाल रूसिया के खिलाफ IPC की धारा 465, 467 और 471 में लिया प्रथम दृष्टया संज्ञान, 9 अक्टूबर को अगली सुनवाई

उरई/जालौन। अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन से जुड़े कथित फर्जी बैनामा और कूटरचित दस्तावेज के मामले में सिविल जज (सीडि.)/एफटीसी जालौन, स्थान उरई की अदालत ने रूसिया फर्नीचर के मालिक कृष्ण गोपाल रूसिया के विरुद्ध प्रथम दृष्टया अपराध बनता मानते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 465, 467 और 471 के तहत संज्ञान लिया है।
अदालत ने परिवाद की अग्रिम कार्यवाही धारा 204 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने आरोपी को सम्मन जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के बाद परिवाद के रूप में हुई थी कार्यवाही –
मामला परिवाद संख्या 1278/2018, ईश्वरदास बनाम पलक आदि से संबंधित है। 10 सितंबर 2026 को पत्रावली न्यायालय के समक्ष पेश हुई। इस दौरान परिवादी की ओर से अधिवक्ता को तलबी के बिंदु पर सुना गया और उपलब्ध दस्तावेजों व पत्रावली का अवलोकन किया गया।
न्यायालय के आदेश के अनुसार, प्रकरण की शुरुआत थाना कोतवाली उरई में दर्ज अपराध संख्या 3875/2014 से हुई थी। इसमें IPC की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। इसके खिलाफ वादी की ओर से प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने 8 मार्च 2018 को प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उसे परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद परिवादी ईश्वरदास का धारा 200 CrPC के तहत बयान दर्ज किया गया और धारा 202 के तहत सुदर्शन को पीडब्ल्यू-1 के रूप में परीक्षित कराया गया।
जमीन हड़पने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने का आरोप –
परिवादी ईश्वरदास का आरोप है कि उसके पिता स्वर्गीय अजुद्दी पुत्र मन्टाई आराजी संख्या 177/2, रकबा 0.408 हेक्टेयर, मौजा राहिया के मालिक और काबिज थे। आरोप के अनुसार, कृष्ण गोपाल रूसिया ने उसके पिता के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कराया और 24 जुलाई 1991 को उक्त जमीन का बैनामा करा लिया।
परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि बैनामे में गाटा संख्या अंकित नहीं थी और जमीन की चौहद्दी भी सही तरीके से दर्ज नहीं की गई थी। परिवादी के अनुसार, जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से कथित दस्तावेज तैयार कराया गया।
मार्च 2026 में सिविल कोर्ट ने बैनामा किया था निरस्त –
परिवादी ने अपने आरोपों के समर्थन में पूर्व न्यायिक निर्णय की सत्यप्रति भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। आदेश में उल्लेख है कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन), जालौन स्थान उरई की अदालत ने 19 मार्च 2026 को दिए निर्णय में 24 जुलाई 1991 के संबंधित बैनामे को निरस्त कर दिया था।
न्यायालय के आदेश के मुताबिक, उक्त निर्णय में यह आधार सामने आया कि संबंधित दस्तावेज अजुद्दी द्वारा निष्पादित नहीं किया गया था। वर्तमान परिवाद में इस पूर्व न्यायिक निर्णय को महत्वपूर्ण सामग्री के रूप में देखा गया।
अदालत ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार माना –
उपलब्ध सामग्री और पूर्व न्यायिक निर्णय का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि 24 जुलाई 1991 का संबंधित दस्तावेज प्रथम दृष्टया कूटरचित प्रतीत होता है। इसी आधार पर न्यायालय ने कृष्ण गोपाल रूसिया के विरुद्ध IPC की धारा 465, 467 और 471 के तहत प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाते हुए संज्ञान लिया।
हालांकि परिवादी ने पलक पुत्र बलराम समेत अन्य लोगों पर भी कृष्ण गोपाल रूसिया के साथ मिलीभगत कर पलक की मां गायत्री देवी और साली सरिता देवी के नाम 3 सितंबर 2007 को कथित फर्जी बैनामा तैयार कराने का आरोप लगाया था।
अन्य आरोपियों के खिलाफ संज्ञान नहीं –
न्यायालय ने शेष विपक्षीगण के संबंध में कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप इस स्तर पर प्रथम दृष्टया पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने यह संभावना भी व्यक्त की कि संबंधित लोगों ने पूर्व जानकारी के बिना सद्भावनापूर्वक प्रतिफल देकर संपत्ति खरीदी हो और वे बोना फाइड परचेजर फॉर वैल्यू विदाउट नोटिस रहे हों।इसी आधार पर अदालत ने शेष विपक्षीगण के विरुद्ध इस स्तर पर संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।
9 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई –
अदालत ने कृष्ण गोपाल रूसिया के विरुद्ध IPC की धारा 465, 467 और 471 के तहत संज्ञान लेते हुए परिवाद की अग्रिम कार्यवाही धारा 204 CrPC के अनुसार आगे बढ़ाने का आदेश दिया है।
आदेश में परिवाद पत्र की प्रति सम्मन के साथ भेजने के निर्देश दिए गए हैं। परिवादी को धारा 204(2) CrPC के तहत साक्षीगण की सूची दाखिल करने को कहा गया है। सूची प्रस्तुत होने के बाद आरोपी को सम्मन भेजे जाने की कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय ने पत्रावली को आरोपी की उपस्थिति के लिए 9 अक्टूबर 2026 को पेश करने का आदेश दिया है।
कानूनी स्थिति –
अदालत द्वारा इस चरण पर प्रथम दृष्टया संज्ञान लिया गया है। यह आदेश अपने आप में आरोपी की दोषसिद्धि नहीं है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही आरोपों पर अंतिम निर्णय होगा।



