अपनी मांगों को लेकर “ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार” के दर्जनों सदस्यों ने दिया ज्ञापन

उरई। दिन बुधवार 10 दिसम्बर 2025 को ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार (TPJP) के दर्जनों सदस्यों ने जिलाधिकारी को सम्बोधित अपना एक ज्ञापन दिया।
दिए गए ज्ञापन के माध्यम उन्होंने बताया कि जैसा कि आपको ज्ञात होगा भारत में 50 करोड़ से अधिक नागरिक संगठित ठगी का शिकार बनकर अपनी और अपनों की जीवनभर की जमापूंजी ठगों के हाथ गंवा चुके हैं और ठगों से यह धन सरकारों ने प्रवर्तन एजेंसीज के माध्यम से जब्त कर लिया है.
केंद्रीय एजेंसी ईडी सेबी सीबीआई एस एफ आई ओ और राज्य की पुलिस एस ओ जी बगैरा ने ज्यादातर ठग कम्पनी सोसाइटी निधि फर्म बिल्डर्स बगैरा की वह चल अचल सम्पत्ति जो उन्होंने ठगी के शिकार बने नागरिकों के धन से खरीदी थीं जब्त कर रखी हैं और इन सम्पत्तियों को बेचकर नीलाम करके ठगी पीड़ितों की जमाराशि का दो से तीन गुणा धन 180 दिन में वापस करने के लिए संसद ने अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी अधिनियम 2019 (Buds Act 2019) बना दिया है जो देश के प्रत्येक उस ठगी पीड़ित को भुगतान की गारंटी देता है जो अपने जमाधन की वापसी के लिए अपनी नजदीकी buds act अथॉरिटी के पास आवेदन करेगा.
अफसोस भारत में करोड़ों ठगी पीड़ितों ने अपने जमाधन की वापसी के लिए आवेदन किए किन्तु सात साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने किसी आवेदक का भुगतान नहीं किया जो संघ एवं राज्य शासन का क्रूर अन्याय है लापरवाही है और जनता एवं कानून के साथ धोखाधड़ी भी. Buds Act 2019 के तहत नियुक्त भुगतान अधिकारी आवेदकों का भुगतान नहीं कर रहे इसकी शिकायत ठगी पीड़ितों ने अनेक बार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिवों तक से की लेकिन किसी का जमाधन वापस नहीं किया गया.
ठगी पीड़ितों के प्रतिनिधि संगठन ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार, तपजप ने सरकारों की इस घोर लापरवाही उदासीनता बेईमानी से दुःखी होकर न्याय की उम्मीद में जुलाई 2025 में W.P. (C) NO 897/2025 के द्वारा सुप्रीम कोर्ट को भी अवगत कराया याचिका दाखिल की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी दिनांक 16/09/2025 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पीड़ितों को यह सलाह दे दी कि वह Buds Act 2019 की अनुपालना के लिए राज्यों के मुख्य सचिवों और हाइकोर्ट्स से सम्पर्क करें उनके कार्यालयों में आवेदन दाखिल करें.
सुप्रीम कोर्ट या कोई भी शासकीय प्रशासनिक अधिकारी वैधानिक रूप से आवेदकों को यह सलाह नहीं दे सकता कि उन्हें क्या करना चाहिए. न्यायालय शासन प्रशासन सबका यह अनिवार्य कर्तव्य है कि वह आवेदकों के अधिकारों की सुरक्षा करें उनके हक्क़ में न्याय करें फैसला सुनाएं आदेश करें न कि उनको सलाह दें या यह बताएं कि उनके लिए क्या भला है. शासन के प्रत्येक अंग ने ठगी पीड़ितों के साथ छल किया है धोखा दिया है जिस कारण से देशभर में लाखों ठगी पीड़ित आत्महत्या कर चुके हैं और करोड़ों पलायन कर चुके हैं अनगिनत अर्ध विक्षिप्त होकर न्याय के लिए दर दर धक्के खा रहे हैं.
शासन अपनी विफलता बेईमानी और लापरवाही को दबाने छुपाने के लिए ठगी पीड़ितों की असहनीय पीड़ा की लगातार अनदेखी कर रहा है और कभी सहारा सी आर सी रिफंड पोर्टल कभी सेबी पर्ल्स रिफंड पोर्टल, साईं प्रसाद रिफंड पोर्टल, समृद्धा जीवन, टोगो, कल्पतरु, कर्मभूमि, गरिमा, मैत्रय, रोजवैली, माइक्रो फाइनेन्स, हीरा गोल्ड, लोनी अर्बन, नवजीवन, ट्रिनटी, अलकैमिस्ट, पिनकौन, समर्थ, साईं प्रकाश, HBN, विश्वामित्र, जी एन गोल्ड, जी एन डेयरी जैसी तीन लाख कंपनी या कभी आदर्श और सागा संजीवनी जनशक्ति जैसी सहकारी समितियों पर परिसमापक नियुक्त करके और कभी जीसीए बाइक बोट जैसी कंपनीज पर दिवालिया कार्रवाई (NCLT) करके तो इन पोंजी स्कीम्स में काम करने वाले एजेंट्स एडवाइजरों के खिलाफ निवेशकों से अपराधिक मुकदमे दर्ज करवाकर ठगी पीड़ितों को आपस में लड़ा रहा है जो शासन का छल है अपराध है. शासन अपने कर्तव्य को पूरा न करके जनता को आपस में लड़वा रहा है जिससे सिद्ध होता है कि शासन ही ठग है वह ठगी पीड़ितों का भुगतान नहीं करना चाहता इसलिये शासन ने गत सात वर्षों में एक भी ऐसे अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जिसकी जिम्मेदारी ठगी की संगठित घटनाओं को रोकने की थी.
देश की दो तिहाई आबादी संगठित ठगी का शिकार बन गई है और यह ठगी की अपराधिक घटनाएं कोई चोरी छुपे नहीं हुई हैं खुलेआम बोर्ड लगाकर कार्यालय खोलकर शासन प्रशासन की मिलीभगत से हुई हैं. शासन अपने कर्तव्य का पालन न करके एजेंट एडवाइजर और निवेशकों को सुनियोजित तरीके से आपस में लड़ा रहा है ताकि ठगी पीड़ित शासन से न लड़कर आपस में लड़ मरें यह शासन का अपराधिक कृत्य है. शासन की सबसे बड़ी अक्षम्य भूल रही उसने सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष किसी भी ठगी प्रकरण में Buds Act 2019 और राज्यों के PID Act,s का हवाला नहीं दिया जिस वजह से हायर ज्यूडिश्यरी कभी सेबी को कभी सी आर सी को कभी लिक्वीडेटर को कभी किसी रिटायर्ड जज को कभी किसी रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी को भुगतान की जिम्मेदारी सौंपती रहीं. यदि शासन ने कोर्ट को भुगतान गारंटी के कानूनों से भुगतान अधिकारियों के कर्तव्यों अधिकारों से परिचित कराया होता। तो संभवतः भुगतान प्रक्रिया इतनी लम्बी न खिंचती और अबतक तहसील स्तर पर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी व तहसीलदार भुगतान कर चुके होते.
शासन भुगतान की गारंटी के अधिकार कानून अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी अधिनियम 2019 का प्रचार प्रसार भी नहीं करवा रहा न किसी पीड़ित का भुगतान करवा रहा न किसी दोषी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहा जिससे सिद्ध होता है कि शासन की नीयत ठगी पीड़ितों का भुगतान करने की नहीं है. शासन के इस अपराधिक कृत्य से ठगी पीड़ितों में तनाव क्षोभ और हताशा बढ़ रही है और करोड़ों नागरिकों का भरोसा न्याय से जड़ रहा है. अतः संघ एवं राज्य सरकारों से अनुरोध है अपने अपने न्यायिक अधिकार क्षेत्र में अविलम्व Buds Act 2019 की अनुपालना सुनिश्चित करते हुए समस्त आवेदकों का भुगतान उनकी जमाराशि के दो से तीन गुणा करें और अलग अलग कंपनी या सोसाइटी के लिए बनाये गए गैरकानूनी रिफंड पोर्टल रिटायर्ड जज कमेटीज इत्यादि को भंग करके समस्त आवेदक ठगी पीड़ितों का भुगतान Buds Act 2019 के तहत कराएं.



