रंग पंचमी पर मंदिरों में हुए होली के कार्यक्रम

कोंच। शुक्रवार की रात रंग पंचमी के अवसर पर मंदिरों में होली महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए गए। धर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित कल्याण राय और बल्दाऊ मंदिरों के अलावा सीतानाथ मंदिर, लक्ष्मीबाई के गुरुद्वारे रामलला मंदिर और अवधविहारी लाल मंदिर में भजन कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित कर भगवान के श्रीविग्रहों को अबीर गुलाल लगा कर होली मिलन किया गया। महिलाओं और संगीत मंडलियों द्वारा देर रात तक भजन कीर्तन होते रहे। स्वर्णकार समाज के मुरली मनोहर मंदिर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कवियों और साहित्यकारों द्वारा उम्दा कविताओं का पाठ किया गया।

मुरली मनोहर मंदिर के गिर्राज सत्संग हॉल में आयोजित काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता बरिष्ठ कवि राजेशचंद्र गोस्वामी ने की जबकि मुख्य अतिथि अवध बिहारी स्वर्णकार एवं विशिष्ट अतिथि नगर संघ चालक नरोत्तमदास स्वर्णकार व अहमदाबाद से आए कवि चंद्रप्रकाश गुप्ता रहे। जन कवि सुनीलकांत तिवारी ने कहा, मुखौटेे मेें हो जो किरदार वो अच्छा नहीं लगता, सियासी मंच पर अब कोई भी सच्चा नहीं लगता। मोहनदास नगाइच ने कविता पाठ में आध्यात्म को जोड़ते हुए कहा, श्रीराम जी में रम कर सरभंग तो बनो, भगवान कृपा करने स्वयं द्वार आएगा। आनंद शर्मा अखिल ने कविता बांची, न कोई तकरार होली में, भरा हो प्यार होली मेें। अंतर्राज्यीय मंचों के अभिनंदित कवि नरेन्द्र मोहन मित्र ने कविता पाठ किया, न मैं इनसे गिला करता न मैं उनसे गिला करता, मैं दरिया सब का गम पीकर समंदर से मिला करता। राजेशचंद्र गोस्वामी, संजय सिंघाल, चंद्र प्रकाश गुप्ता, ओंकारनाथ पाठक, पारसमणि अग्रवाल, प्रमोद कस्तवार, राजेन्द्र सिंह रसिक, मुन्ना यादव आदि ने भी रचना पाठ किया। संचालन मास्करसिंह माणिक्य ने किया। आभार संस्था अध्यक्ष चतुर्भुज चंदेरिया ने जताया। इस दौरान राधेलाल चंदेरिया, डॉ. पीडी चंदेरिया, शशिकांत सोनी, कृष्णकुमार, अभिषेक रिछारिया, देवेेन्द्र सोनी, मंजुल मयंक, अनिल कपूर, चंद्रशेखर नगाइच सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। पंकज हिंदी संबद्र्घन संस्थान के तत्वाधान में भी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें संजीव सरस, दिनेश मानव, नंदराम भावुक, कालीचरण सोनी आदि ने कविता पाठ किया।



