उरई में 450 करोड़ की नजूल जमीन के फर्जीवाड़े का खुलासा, प्रशासन ने दर्ज कराई FIR
7.26 एकड़ सरकारी जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अधिकार जताने और बिक्री की कोशिश का आरोप, डीएम के निर्देश पर हुई जांच

उरई। उरई में करोड़ों रुपये की सरकारी नजूल भूमि को निजी संपत्ति में बदलने के कथित प्रयास का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन के मुताबिक ग्राम लहरिया स्थित 7.26 एकड़ नजूल भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 450 करोड़ रुपये बताई गई है, से जुड़े दस्तावेजों की जांच में फर्जीवाड़े के तथ्य सामने आए हैं। मामले में कोतवाली उरई में संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। प्रशासन के अनुसार मामला गाटा संख्या 518 की 7.26 एकड़ नजूल भूमि से जुड़ा है। राजस्व अभिलेखों की जांच में यह जमीन राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज मिली है।
99 साल के पट्टे पर दी गई थी जमीन –
प्रशासन के अनुसार उपलब्ध पुराने अभिलेखों में इस भूमि को 15 मार्च 1914 को 99 वर्ष के पट्टे पर दिए जाने का उल्लेख है। पट्टे की शर्तों में वार्षिक लीज रेंट जमा करने और आवासीय मकान बनाने की बात थी। साथ ही कलेक्टर की अनुमति के बिना भवन में बदलाव करने अथवा भूमि और भवन का मूल उपयोग बदलने पर रोक थी।
अभिलेखों में शुरुआती लीज ए.के. पसन्ना के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद वर्ष 1918 में उनकी पुत्री एलिस पसन्ना द्वारा बी.सी.एच., पूना के पक्ष में जमीन के विक्रय का उल्लेख मिला। बाद में बी.सी.एच., पूना के अधिकृत प्रतिनिधि जॉन ई. नॉटन द्वारा 23 सितंबर 1949 को मिस एडेलिन ग्रीगर के पक्ष में विक्रय किए जाने का रिकॉर्ड जांच में सामने आया।
2014 में खत्म हो चुकी थी लीज –
जांच में प्रशासन ने पाया कि संबंधित भूमि की लीज वर्ष 2014 में समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद जमीन पर अधिकार और उससे जुड़े लेन-देन के दावे सामने आते रहे।
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि संबंधित सेल डीड का उल्लेख कलेक्टर उरई के नजूल रजिस्टर और नगर पालिका परिषद उरई के संपत्ति रजिस्टर में नहीं मिला।
डीएम ने गठित कराई तीन सदस्यीय जांच समिति –
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने 6 मई और 27 मई 2026 को जारी आदेशों के क्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
समिति ने राजस्व अभिलेख, नजूल रजिस्टर, खतौनी, पुराने दस्तावेज और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। प्रशासन के मुताबिक जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि मूल आवंटी से अलग व्यक्तियों द्वारा वर्ष 1953 में डीड तैयार कर नजूल भूमि को कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बेचने का प्रयास किया गया। जांच रिपोर्ट में इन दस्तावेजों के आधार पर ट्रस्ट आदि के गठन का भी उल्लेख किया गया है।
सरकारी रिकॉर्ड में जमीन राज्य सरकार की –
जांच समिति ने अपने निष्कर्ष में संबंधित भूमि को शासकीय अभिलेखों में राज्य सरकार की संपत्ति बताया है। कार्रवाई के लिए खतौनी, जिलाधिकारी के 28 जुलाई 2026 के आदेश, 8 जुलाई 2026 की जांच आख्या सहित अन्य दस्तावेजों को आधार बनाया गया।
इसके बाद नगर पालिका परिषद उरई के अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील ने प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली उरई को पत्र भेजकर संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
इन पर कार्रवाई का दायरा –
प्रकरण में वर्तमान कब्जेदार बेथनी क्रिश्चियन होम्स मिशन/बी.सी.एच. मिशन की प्रबंधक किरन के मसीह सहित संस्था से जुड़े अन्य व्यक्तियों तथा जमीन की खरीद-फरोख्त में शामिल बताए गए व्यक्तियों और संस्थाओं को कार्रवाई के दायरे में रखा गया है।
प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक फर्जी लीज डीड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सरकारी जमीन पर निजी अधिकार जताने, उसके विक्रय या हस्तांतरण और आर्थिक लाभ हासिल करने का प्रयास किया गया।
क्या है पूरा मामला..?
जमीन: गाटा संख्या 518
क्षेत्रफल: 7.26 एकड़
प्रशासन द्वारा बताई गई कीमत: करीब 450 करोड़ रुपये
भूमि की स्थिति: नजूल/राज्य सरकार की संपत्ति
मूल पट्टा: 15 मार्च 1914
पट्टे की अवधि: 99 वर्ष
लीज समाप्त: 2014
कार्रवाई: तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद FIR
जिला प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच के दौरान मामला सामने आने के बाद समय रहते कार्रवाई की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी संपत्ति में बदलने अथवा उसके अवैध हस्तांतरण का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नोट: FIR दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के परिणाम के आधार पर होगी।



