यूपी की कमान अब पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी के हाथों में, बनाया गया उ० प्र० कांग्रेस कमेटी का प्रदेश अध्यक्ष

उरई/जालौन। सबसे पहले चतुर्भुज शर्मा और अब पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी। चर्चा में अभी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव और विवाद था कि बिना किसी शोरगुल के उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नियुक्त कर लिया गया। इसमें उरई के बृजलाल खाबरी बाजी मार ले गए।
कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम की ओर लौटने की कोशिश में है। ताजा मनोनयनों से यही स्पष्ट होता है। वैसे जिले की राजनीति के लिए यह खुशी का दिन है। छात्र राजनीति से ही खाबरी जिस प्रकार मुखर रहे, उनका यह गुण उन्हें राजनीतिक सोपान चढ़ाता रहा है।
जब वे बिल्कुल युवा थे तब मायावती ने उन्हें 1995 में बसपा का जालौन जिलाध्यक्ष बनाया था। इसके बाद उन्हें 1999 में जालौन- गरौठा से लोकसभा का टिकट दिया गया जिसमें उन्होंने कामयाबी हासिल कर बसपा का खाता खोला। बसपा के खाते में तब से यही एक कामयाबी है। 2009 में बसपा से ही वे राज्यसभा सदस्य बने। कई अवसर ऐसे भी आये जब उन्हें बसपा से बाहर होना पड़ा।
इसके बाद वे गुलाम नबी के माध्यम से राहुल-प्रियंका के संपर्क में आये। इस वक्त वे हाई कमान कर पसंदीदा हैं। एक वक्त था जब बसपा में नसीमुद्दीन का प्रभाव खाबरी से ज्यादा रहता था। कांग्रेस में नसीमुद्दीन जरूर पीछे रह गए। चौधरी समाज के वोटों को साधने के लिए कांग्रेस का यह प्रयोग है। इसका लाभ पार्टी को अवश्य मिल सकता है।
आखिर कौन हैं बृजलाल खाबरी ?
आपको बता दें कि बुंदेलखंड के जालौन ज़िले में एक तहसील है कोंच। कोंच के एक छोटे से खाबरी नाम के गाँव के रहने वाले हैं बृजलाल। बृजलाल से बृजलाल खाबरी बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। बात 1977 की है। खाबरी गाँव में दलित समाज के ऊपर आए दिन अत्याचार होता था।
एक दिन एक दलित बृजलाल के पिता के पास आकार रोने लगा। तब 9 वीं क्लास में पढ़ने वाले बृजलाल ने ग़ुस्से में तमतमाए हुए उस दलित पीड़ित के साथ थाने पर पहुँच गये। दरोग़ा से दमदारी के साथ बात की और दलितों के साथ मारपीट करने वालों पर मुक़दमा दर्ज करवा दिया। यहीं से बृजलाल से बृजलाल खाबरी बन गये। रोज़ाना दलितों के हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए थाना-कचहरी में बृजलाल खाबरी दिखने लगे। और दलित चेहरा बनकर उभरे।
बाद में जालौन के डीएवी पीजी कॉलेज में बृजलाल खाबरी एक लोकप्रिय छात्र नेता के बतौर जाने जाते थे। छात्र राजनीति में कई आंदोलनों के अगुवाई की। दो बार चुनाव लड़े लेकिन कुछ वोटों से पराजय मिली लेकिन राजनीति छोड़ी नहीं।
कुछ लोगों का कहना कि कांशीराम जी एक बार उरई कैडर (प्रशिक्षण) देने आए थे। बसपा में उन दिनों मिशन में नौजवानों को जोड़ने का बड़ा ज़ोर था। बसपा संस्थापक कांशीराम के भाषण से प्रभावित होकर बृजलाल खाबरी ने घर-बार छोड़ दिया। 1999 के लोकसभा चुनाव में बृजलाल खाबरी जालौन से सांसद चुने गये। अगला चुनाव खाबरी हार गए लेकिन कांशीराम ने उन्हें राज्य सभा भेज दिया।
बृजलाल खाबरी ने एक संगठनकर्ता के बतौर शायद ही यूपी का कोई ज़िला रहा हो जहां काम न किया हो। गोरखपुर, आज़मगढ़, इलाहाबाद, पश्चिम के कई ज़िलों में प्रभारी के बतौर काम किया है। कांग्रेस को बृजलाल खाबरी का सांगठनिक तजुर्बा और जातीय आधार दोनों ही मज़बूत करेगा।



