ग्राम जुगराजपुरा में दिखे विलुप्तप्राय गिद्ध, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

कोंच (पीडी रिछारिया) पिछले कई वर्षों से विलुप्तप्राय हो चुके प्राकृतिक स्वच्छकार पक्षी गिद्धों का एक छोटा सा झुंड तहसील क्षेत्र के ग्राम जुगराजपुरा में दिखाई दिया। गिद्धों का यह झुंड देखकर ग्रामीण इलाके के लोगों में आश्चर्य देखा गया। उत्सुकतावश ग्रामीणों ने खेतों में मृत पड़े मवेशी के पास बैठे गिद्धों के झुंड का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिया जो फिलहाल जमकर वायरल हो रहा है। ग्रामीण इलाके के लोग इसको पर्यावरण में बदलाव का अच्छा संकेत भी मान रहे हैं क्योंकि गिद्धों को प्राकृतिक स्वच्छकार भी माना जाता है। इसके अलावा भारत में गिद्धों का पौराणिक महत्व भी बताया गया है। महाकाव्य रामायण में सीता हरण के दौरान लंकेश रावण और गीधराज जटायु के बीच युद्ध का वर्णन आया है।
गौरतलब है कि कोंच तहसील क्षेत्र के ग्राम जुगराजपुरा में खेतों में मृत पड़े एक मवेशी के आसपास आधा दर्जन से भी अधिक गिद्ध पक्षियों को देखा गया है जिन्हें लेकर ग्रामीणों में आश्चर्य है। दरअसल, धीरे धीरे करके यह गिद्ध नामक पक्षी इस क्षेत्र से लगभग पूरी तरह विलुप्त हो चुके हैं। आलम यह है कि अब यदाकदा भी इलाके में गिद्ध नजर नहीं आते हैं। ऐसे में गिद्धों के इस झुंड का दिखाई देना बाकई न केवल दिलचस्प है बल्कि लोगों में कौतुहल पैदा करने वाला भी है। लोग इसे पर्यावरण में बदलाव की दृष्टि से भी अच्छा संकेत मान रहे हैं। लोगों का मानना है कि प्रशासन और खासतौर पर वन विभाग को गिद्धों की उपस्थिति पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेकर उनके ठिकाने की खोज करके उनके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। गिद्धों को देखकर ग्रामीणों का उत्साह देखने लायक है। उनके गिद्धों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के पीछे का मकसद भी यही रहा है कि गिद्धों को संरक्षण मिल सके। राम सिंदूर गुर्जर, राम मनोहर गुर्जर ब्रजेश श्रीवास्तव सहित दर्जनों लोगों का मानना है कि गिद्धों का दिखना प्रकृति के लिए शुभ संकेत है।
पर्यावरण संरक्षण में गिद्ध की है महत्वपूर्ण भूमिका –
बता दें कि गिद्ध मुर्दाखोर पक्षी होते हैं जो बड़े पशुओं के शवों को खाते हैं जिसके चलते पर्यावरण को साफ करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गिद्ध का वर्णन भारत के पौराणिक महाकाव्य रामायण में किया गया है जहां रावण के चंगुल से सीता को बचाने के दौरान गिद्धों के राजा जटायु ने रावण के साथ घनघोर युद्ध किया और अपनी जान तक गंवा दी थी।
कभी लाखों में थे, अब हजारों में रह गई है इनकी संख्या –
आंकड़े बताते हैं कि 1980 के दशक में भारत में सफेद पूंछ वाले गिद्धों की संख्या करीब 80 मिलियन (800 लाख) थी जबकि आज 2022 में इनकी संख्या 40 हजार से भी कम रह गई है। डोडो समेत यह दुनिया में किसी भी पक्षी प्रजाति की सबसे तेजी से हुई कमी है। जैसा कि हम जानते हैं, गिद्ध स्वच्छता के काम में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। गिद्धों के विलुप्त होने से प्रकृति में तमाम विपरीत परिणाम देखे गए हैं।



