जिला कारागार उरई में विधिक शिविर, बंदियों की समस्याओं की सचिव ने ली जानकारी
जमानत के बावजूद रिहाई से वंचित बंदियों की सूची मांगी, जरूरतमंदों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश

उरई। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को जिला कारागार उरई का साप्ताहिक भ्रमण एवं विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न बैरकों का निरीक्षण कर बंदियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं एवं उन्हें उपलब्ध कराई जा रही विधिक सहायता की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि ऐसे बंदियों की सूची तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन को उपलब्ध कराई जाए, जिनकी जमानत सक्षम न्यायालय से स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर उपलब्ध नहीं होने के कारण वे अभी तक रिहा नहीं हो सके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी कर बंदियों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाए। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की जमानत के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र बंदियों को राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति, जालौन के माध्यम से विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
निजी अधिवक्ता नहीं होने पर मिलेगी विधिक सहायता –
निरीक्षण के दौरान बंदियों के मुकदमों की पैरवी, विधिक सहायता एवं कानूनी सलाह की स्थिति की भी जानकारी ली गई। सचिव ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि ऐसा कोई भी बंदी, जिसका निजी अधिवक्ता नहीं है अथवा न्यायालय में उचित ढंग से पैरवी नहीं हो पा रही है, उसे नियमानुसार विधिक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा, खान-पान सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली गई। सचिव ने कई बंदियों से व्यक्तिगत रूप से उनकी समस्याएं पूछीं। बंदियों ने इस दौरान किसी विशेष समस्या की जानकारी नहीं दी।
लीगल एड हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण –
सचिव ने मुलाकाती क्षेत्र में बंदियों के परिजनों की सहायता के लिए स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण किया और उसकी कार्यप्रणाली की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान जेल के मुख्य द्वार पर मरम्मत का कार्य भी चल रहा था।
प्ली बार्गेनिंग और लीगल एड क्लीनिक पर विधिक साक्षरता शिविर –
इसके बाद जिला कारागार में प्ली बार्गेनिंग एवं लीगल एड क्लीनिक के लाभ और कार्यप्रणाली विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने की।
शिविर में डिप्टी चीफ एलएडीसी श्री उमेश मिश्रा ने संविधान के अनुच्छेद 39ए के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत समाज के गरीब एवं कमजोर वर्गों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने तथा सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
असिस्टेन्ट एलएडीसी श्री अभिषेक पाठक ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 22(1) से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कानून के समक्ष समानता और विधिक संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधान न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिविर में प्ली बार्गेनिंग की अवधारणा और उसके उद्देश्य पर भी जानकारी दी गई। बताया गया कि प्ली बार्गेनिंग के माध्यम से कुछ मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचने और न्यायालय के समय एवं संसाधनों के बेहतर उपयोग का प्रयास किया जा सकता है। भारत में प्ली बार्गेनिंग की व्यवस्था आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2005 के माध्यम से लागू की गई थी।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री प्रशान्त मौर्य, कारापाल श्री प्रदीप कुमार, उपकारापाल श्री अमर सिंह एवं श्रीमती सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला सहित जेल प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।



