जिला कारागार उरई में विधिक साक्षरता शिविर का किया गया आयोजन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने जिला कारागार उरई का किया निरीक्षण

उरई। उ० प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चन्द्रा ने जिला कारागार उरई में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं साप्ताहिक भ्रमण किया। उन्होने विभिन्न बैरकों का भ्रमण किया और वहां निरूद्ध बन्दियों से पूछ-तांछ करते हुये उनकी समस्यों को जाना समझा तथा जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। इस मौके पर जेल प्रशासन के अधिकारीगण मौजूद रहे।

निरीक्षण में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चन्द्रा ने बन्दियों के मुकदमों की पैरवी, उनको दी जाने वाली विधिक सहायता/सलाह और महिला बन्दी व उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा व खान-पान इत्यादि के बारे में जाना-परखा। उन्होंने कई बन्दियों से अलग-अलग जानकारी ली एवं जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि कोई भी ऐसा बन्दी जिसका निजी अधिवक्ता न हो अथवा विधिवत् ढंग से न्यायालयों में पैरवी न हो पा रही हो, को विधिक सहायता दिलाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। यदि किसी विचाराधीन बन्दी को पैरवी हेतु सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता की आवश्यकता हो तो सम्बन्धित न्यायालय में बन्दी की ओर से प्रार्थना पत्र दिलवाया जाना सुनिश्चित करें, जिन बन्दी की जमानत हो गई हो पर जमानतदार की उपलब्धता ना होने पर जेल में अब भी निरूद्ध है वो भी लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल की सुविधा ले सकते है। इसी प्रकार जो बन्दी दोषसिद्ध हो चुके हैं, की अपील न हो पाने की स्थिति में नियमानुसार जेल अपील करायी जाये। इसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से आवश्यक समन्वय बनाकर ऐसे प्रकरणों का निर्धारित समयावधि में निस्तारण किया जाये ताकि अपील की मियाद समाप्त न होने पाये। जेल अपील कराये जाने में यदि कोई विधिक समस्या आ रही है तो उसको जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संज्ञान में लाते हुये द्वारा उचित माध्यम माननीय उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से यथा आवश्यक पत्राचार किया जाये।

विधिक साक्षरता शिविर की अध्यक्षता करते हुये सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चन्द्रा ने कार्य स्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न विषय पर विस्तृत जानकारी दी। चीफ लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल श्री विश्राम सिंह तथा अस्सिटेंट लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल श्री अभिषेक पाठक ने इस मौके पर बन्दियों को वरिष्ठ नागरिकों/बन्दियों के अधिकारों के सम्बन्ध में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई विचाराधीन बन्दी अधिकतम 07 वर्ष तक की सजा के मामलों में विचाराधीन है, तो जिन्होंने सजा के तौर पर कुछ अवधि जेल में बिता ली हो, वह पीड़ित पक्ष से समझौता कर उसे उचित मुआवजा देकर अपनी सजा न्यायालय से कम करा सकते है, लेकिन इस योजना का लाभ उनको नहीं मिलेगा जिन्होंने देश के विरूद्ध, महिलाओं एवं बच्चों के विरूद्ध अथवा आर्थिक अपराध किया हो।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक प्रशान्त मौर्या, चिकित्साधिकारी राहुल वर्मन, उप कारापाल अमर सिंह एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक शुभम् शुक्ला भी उपस्थित रहे।



